<h3 style="text-align: justify;">कपास की फसल में आवश्यक सस्य क्रियाएं </h3> <p style="text-align: justify;">कपास के पौधों पर दीमक, हरे तिले तथा कलियों, फूल व टिंडों पर अमेरिकन सूंडी हेलीओथिस के आक्रमण होने पर 1 लीटर क्लोरपायरीफॉस पानी में 70 मि.ली. पत्तों पर चिपकने वाला पदार्थ डालकर छिड़कें। देसी कपास सितंबर में चुनने के लिए तैयार होती है। 10 दिनों के अन्दर सूखी व साफ कपास की चुनाई करें। अमेरिकन कपास में ज्यादा फैलाव रोकने के लिए 30 मि.ली. साईकोसिल (70 प्रतिशत) को 300 लीटर पानी में वोकी आने के समय पर छिड़कें। इसके साथ कीटनाशक तथा यूरिया भी मिलाकर छिड़का जा सकता है। कपास में आखिरी सिंचाई 33 प्रतिशत टिंडे खुलने पर कर दें। इसके बाद कोई सिंचाई न करें। </p> <p style="text-align: justify;"><img class="image-inline" src="https://static.vikaspedia.in/mediastorage/image/ccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccccPIC2.jpg" width="190" height="240" /></p> <h4 style="text-align: justify;">फलछेदक</h4> <p style="text-align: justify;">कपास में अमेरिकन बॉलवर्म, पिंक बाले वर्म तथा स्पॉटेड बॉलवर्म फसल को बहुत हानि पहुंचाते हैं। फलछेदक नियंत्रण के लिए (1) बीज बुआई से पूर्व इमिडाक्लोरोप्रिड से 7.5 ग्राम/कि.ग्रा. की दर से उपचारित कर लेना चाहिए, (2) फसल के 45 तथा 55 दिनों के होने पर 5 प्रतिशत नीम सीड कर्नल निलम्बन का छिड़काव करना चाहिए, (3) अमेरिकन बालॅवर्म से फसल प्रभावित होने पर एन.पी.वी. की 250 एल.ई. मात्रा/हैक्टर की दर से छिड़काव करना चाहिए तथा बीटी नुस्खे की मात्रा 1.5 कि.ग्रा./हैक्टर का भी छिड़काव करना चाहिए। </p> <h4 style="text-align: justify;">चुनाई</h4> <p style="text-align: justify;">कपास में फूल काफी लम्बी अवधि तक आते हैं। सभी पौधों पर फूल एक साथ नहीं आते और प्रत्येक पौधे पर भी सारे फूल एक साथ नहीं आते हैं। फसल बोने के दो-ढाई महीने बाद फूल खिलने शुरू हो जाते हैं। फूलों के साथ न खिलने के कारण कपास की चुनाई काफी समय तक चलती रहती है। काफी संख्या में गूले पक जाएं तो पहली चुनाई की जाती है। उसके बाद दोबारा जब कुछ और गूले पक जाएं तो उन्हें चुन लिया जाता है। इस प्रकार चुनाई कई बार करनी पड़ती है। आमतौर पर 3-4 बार चुनाई करते हैं। चुनाई कितनी बार करनी चाहिए, यह कपास की प्रजाति, वर्षा एवं पंक्तियों की दूरी आदि पर निर्भर करता है।</p> <p style="text-align: justify;">स्त्राेत : खेती पत्रिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद(आईसीएआर), नई दिल्ली। </p>